Homeदिल्ली-एनसीआरDelhi Police Humanity: दिल्ली पुलिस ने 37 दिन बाद मानसिक रूप से...

Delhi Police Humanity: दिल्ली पुलिस ने 37 दिन बाद मानसिक रूप से कमजोर महिला को परिवार से मिलाया, भावुक कर देने वाला पुनर्मिलन

Delhi Police Humanity: दिल्ली पुलिस ने 37 दिन बाद मानसिक रूप से कमजोर महिला को परिवार से मिलाया, भावुक कर देने वाला पुनर्मिलन

दिल्ली पुलिस ने एक संवेदनशील और मानवीय पहल दिखाते हुए मध्य प्रदेश की एक 21 वर्षीय मानसिक रूप से कमजोर और दिव्यांग महिला को उसके परिवार से मिलवाया। यह महिला करीब 37 दिनों से लापता थी और पिछले महीने शाहदरा के सीमापुरी इलाके में गर्भवती अवस्था में लावारिस मिली थी। परिजनों से मिलते ही महिला फूट-फूट कर रो पड़ी, जिससे वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी भावुक हो उठे।

शाहदरा के पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने बताया कि 1 सितंबर को सीमापुरी थाने में एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी, जिसमें एक गर्भवती लावारिस महिला के इलाके में भटकने की सूचना दी गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्रारंभिक जांच के बाद महिला को न्यायालय में पेश किया गया। अदालत ने आदेश दिया कि महिला का मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और उपचार दिल्ली के मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS) में कराया जाए।

IHBAS में भर्ती होने के बाद महिला का इलाज शुरू हुआ और साथ ही उसके परिवार का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई। हेड कांस्टेबल अंकुश और कांस्टेबल राज को मध्य प्रदेश के रानीखेड़ा गांव भेजा गया, जहां से महिला का संबंध बताया गया था। शुरुआती प्रयासों में पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली, जिसके बाद महिला के विवरण और तस्वीर को दो प्रमुख अखबारों—द टाइम्स ऑफ इंडिया और पंजाब केसरी—में प्रकाशित कराया गया।

इसी दौरान 7 सितंबर को महिला ने IHBAS में एक समय से पहले बच्ची को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश एसडीएन अस्पताल में इलाज के दौरान नवजात की मृत्यु हो गई। यह घटना पुलिस टीम को और अधिक संवेदनशील बना गई और उन्होंने महिला के परिवार की तलाश तेज कर दी।

पुलिस टीम ने दोबारा मध्य प्रदेश का दौरा किया और इस बार बागेश्वर धाम क्षेत्र के स्थानीय लोगों की मदद से महिला की पहचान की गई। वहां लगाए गए पोस्टरों से परिजनों का सुराग मिला और आखिरकार महिला का अपने परिवार से मिलन संभव हो सका।

डीसीपी प्रशांत गौतम ने बताया कि यह पुनर्मिलन बेहद भावनात्मक क्षण था — महिला अपने परिवार को देखते ही जोर-जोर से रोने लगी और परिजन भी भावुक हो गए। उन्होंने इस मामले में शामिल सभी पुलिसकर्मियों, विशेषकर हेड कांस्टेबल अंकुश और कांस्टेबल राज की सराहना की, जिन्होंने संवेदनशीलता और मानवीयता के साथ इस मामले को अंजाम तक पहुंचाया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments