Digital Arrest Scam: मुंबई एटीएस और IPS अधिकारी बनकर करते थे साइबर ठगी, दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा
नई दिल्ली, 1 जुलाई : दिल्ली पुलिस की साइबर साउथ टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को निशाना बनाने वाले एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को मुंबई एटीएस, आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और कार्रवाई का भय दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करते थे। पुलिस ने उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 18 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा एक महिला की शिकायत के बाद हुआ। पीड़िता ने बताया कि ठगों ने उसे डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 7.22 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को मुंबई एटीएस, एक आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर महिला को लगातार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर रखा और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली।
शिकायत मिलने के बाद साइबर साउथ थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम सबसे पहले पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में भेजी गई, जिसके बाद उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर ट्रेल छिपाने का प्रयास किया गया।
तकनीकी जांच और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी की। इस दौरान समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी साइबर ठगों को बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल देशभर में डिजिटल ठगी को अंजाम देने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 18 डेबिट-क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके और देश के विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी के मामलों से इनके संबंधों का पता लगाया जा सके।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, एटीएस या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराने, डिजिटल अरेस्ट की धमकी देने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाए, तो उसकी बातों में न आएं। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।



