Festival Security: पूर्वी दिल्ली में ईद मिलाद-उन-नबी और गणेश चतुर्थी को लेकर पुलिस की अहम बैठक, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर मंथन
नई दिल्ली। आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पूर्वी जिला पुलिस ने विभिन्न धार्मिक आयोजनों से जुड़े प्रतिनिधियों और स्थानीय समितियों के सदस्यों के साथ अहम बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त आईपीएस राजीव कुमार ने की। इसमें ईद मिलाद-उन-नबी और गणेश चतुर्थी के आयोजकों के साथ RWA, MWA, पुलिस मित्र, अमन कमेटी और हिंदू-मुस्लिम-ईसाई एकता कमेटी के सदस्य शामिल हुए।
बैठक में त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने, धार्मिक जुलूसों के रूट, संभावित भीड़, यातायात प्रबंधन, बिजली-पानी की व्यवस्था और आपात स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। पुलिस अधिकारियों ने आयोजकों से अपने कार्यक्रम निर्धारित नियमों और प्रशासन की ओर से तय व्यवस्थाओं के अनुसार आयोजित करने की अपील की।
ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर पूर्वी दिल्ली में निकलने वाले जुलूस को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। आयोजकों ने पुलिस अधिकारियों को प्रस्तावित रूट, जुलूस में शामिल होने वाले लोगों की संभावित संख्या और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी।
आयोजक राजा ने बैठक में बताया कि त्रिलोकपुरी ब्लॉक-C बस स्टैंड से सुबह जुलूस निकाले जाने की योजना है। इसमें करीब 1000 से 1200 लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की संभावित भागीदारी को देखते हुए पुलिस ने रूट और भीड़ प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
बताया गया कि जुलूस त्रिलोकपुरी के अलग-अलग ब्लॉकों से होकर गुजरेगा। इसके बाद कोटला गांव, आचार्य निकेतन, राशि गार्डन और मयूर विहार की ओर जाएगा। विभिन्न इलाकों से गुजरने के बाद जुलूस वापस ब्लॉक-27 पहुंचेगा, जहां इसका समापन किया जाएगा।
जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े, इसके लिए पुलिस और आयोजकों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया। संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने और जुलूस को निर्धारित रूट के अनुसार संचालित करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में केवल ईद मिलाद-उन-नबी ही नहीं, बल्कि गणेश चतुर्थी को लेकर भी सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की गई। गणेश चतुर्थी के दौरान पूर्वी दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में लगाए जाने वाले पंडालों और वहां जुटने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही जन्माष्टमी और रक्षाबंधन जैसे अन्य त्योहारों के मद्देनजर भी पुलिस व्यवस्था और विभागीय तैयारियों पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के दौरान आयोजकों और स्थानीय नागरिकों का सहयोग कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विपुल अनिकेत के अलावा पूर्वी जिले के सभी संबंधित ACP, SHO और अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। BSES और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों की मौजूदगी में बिजली और पानी से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई, ताकि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी समस्या की स्थिति में संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर सकें।
पुलिस अधिकारियों ने धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूसों के आयोजकों से अपील की कि वे तय दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संभावित समस्या की सूचना तुरंत पुलिस को दें। आयोजन स्थलों और जुलूसों में भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए स्वयंसेवकों और आयोजकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
बैठक का संचालन कर रहे रियाजुद्दीन सैफी ने कहा कि स्थानीय नागरिक, अमन कमेटी, पुलिस मित्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य पुलिस की आंख और कान की तरह काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर मिलने वाली जानकारी और लोगों का सहयोग किसी भी संभावित समस्या को समय रहते रोकने में मददगार साबित हो सकता है।
उन्होंने त्योहारों के दौरान आपसी भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों के सामूहिक सहयोग से ही बड़े आयोजनों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सकता है।
बैठक में रजत सेठ, राहुल लुंबा, पिंकी त्यागी, चंद्र शेखर, पंकज भगत और रवि सक्सेना समेत विभिन्न समितियों एवं संगठनों से जुड़े कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने त्योहारों से संबंधित स्थानीय व्यवस्थाओं और आवश्यकताओं को पुलिस अधिकारियों के सामने रखा।
पूर्वी जिला पुलिस ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय मजबूत रखने पर जोर दिया है। पुलिस का उद्देश्य है कि ईद मिलाद-उन-नबी, गणेश चतुर्थी और अन्य त्योहारों के दौरान श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकें और पूरे जिले में कानून-व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सौहार्द कायम रहे।



