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Grand Ramleela Dussehra: भव्य रामलीला में अहिरावण वध का मंचन बना आकर्षण, रावण दहन के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ दशहरा उत्सव

Grand Ramleela Dussehra: भव्य रामलीला में अहिरावण वध का मंचन बना आकर्षण, रावण दहन के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ दशहरा उत्सव

राजधानी दिल्ली में भव्य रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित विजयदशमी महोत्सव अत्यंत धूमधाम, सांस्कृतिक गरिमा और असीम धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस वर्ष के दशहरा उत्सव में रामलीला मंचन के दौरान ‘अहिरावण वध’ का प्रसंग श्रद्धालुओं और दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। मंचन में कलाकारों ने रामायण के उस अलौकिक प्रसंग को जीवंत कर दिया, जिसमें लंकापति रावण का मायावी भाई अहिरावण छल-कपट से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का हरण करके पाताल लोक ले जाता है। इसके पश्चात पवनपुत्र हनुमान जी द्वारा पाताल लोक में प्रवेश करने, अहिरावण की मायावी शक्तियों को ध्वस्त करने और अंततः उसका संहार कर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण को बंधनमुक्त कराने के दृश्यों ने पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को पूरी तरह भावविभोर कर दिया।

समिति के प्रधान सतीश लूथरा ने बताया कि इस बार रामलीला मंचन और विशेष दृश्यों को भव्य स्वरूप देने के लिए आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव और विशेष तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया था। कलाकारों के सधे हुए अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी ने मंचन को अद्वितीय बना दिया। विशेष रूप से हनुमान जी के पराक्रम और अहिरावण के साथ हुए भीषण युद्ध के दृश्यों के दौरान पूरा प्रांगण ‘जय श्री राम’ और ‘बजरंग बली की जय’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और तन्मयता के साथ रामकथा के इस मंचन का आनंद लिया।

अहिरावण वध के सफल मंचन के उपरांत विजयदशमी पर्व की मुख्य परंपरा का निर्वाह करते हुए विशालकाय पुतलों का दहन किया गया। अहंकारी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के गगनचुंबी पुतले जैसे ही धू-धू कर जले, आतिशबाजी के साथ असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का अमर संदेश प्रसारित हुआ। शाम सात बजे से शुरू हुए इस महाआयोजन में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें वालंटियर्स और पुलिसकर्मियों की संयुक्त निगरानी में कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठान, पारंपरिक लोकसंस्कृति और अपार जनसमूह की भागीदारी के साथ इस वर्ष का दशहरा उत्सव स्मरणीय बन गया।

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