Jhilmil Industrial Area: झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में मेट्रो की हरी पट्टी के व्यावसायिक आवंटन पर उठे सवाल, ट्रैफिक और नाले की समस्या को लेकर विधानसभा में चिंता
नई दिल्ली। शाहदरा विधानसभा क्षेत्र के झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में मेट्रो की हरी पट्टी की जगहों के व्यावसायिक आवंटन को लेकर यातायात, पार्किंग और नाले की व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए क्षेत्र में पहले से मौजूद यातायात दबाव और भविष्य में बढ़ने वाली परेशानियों पर ध्यान दिलाया गया।
झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया के ए और बी ब्लॉक में मेट्रो पिलर्स के नीचे उपलब्ध हरी पट्टी की जगहों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कहा गया कि इन स्थानों पर यदि पर्याप्त पार्किंग और जरूरी नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था किए बिना व्यावसायिक प्रतिष्ठान शुरू किए जाते हैं तो क्षेत्र में यातायात की समस्या और गंभीर हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर पहले से ही झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में सड़कों पर वाहनों का दबाव बना रहता है। औद्योगिक गतिविधियों के कारण यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी, व्यापारी, मालवाहक वाहन और आम लोग आवाजाही करते हैं। ऐसे में नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के शुरू होने से वाहनों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई गई है।
विधानसभा में यह भी चिंता जताई गई कि संकरी सड़कों पर यदि नए प्रतिष्ठानों के गेट खुलते हैं तो इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ सकता है। वाहनों के रुकने, सामान लोड और अनलोड करने तथा ग्राहकों की आवाजाही के कारण सड़क पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। इससे स्थानीय व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण चिंता PWD के नाले को कवर किए जाने को लेकर सामने आई है। विधानसभा में कहा गया कि नाले को ढकने के बाद उसकी नियमित सफाई और रखरखाव में गंभीर दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। बरसात के दौरान नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। ऐसे में नाले के रखरखाव को ध्यान में रखे बिना किए गए निर्माण या व्यावसायिक इस्तेमाल से भविष्य में जलभराव जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
इस मुद्दे को उठाते हुए स्पष्ट किया गया कि किसी भी व्यावसायिक आवंटन में केवल जगह के उपयोग को प्राथमिकता देने के बजाय जनहित और क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। खासतौर पर यातायात, पार्किंग, जल निकासी और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही से जुड़े पहलुओं का पहले से आकलन किया जाना चाहिए।
विधानसभा में मांग की गई कि झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को स्थान देने से पहले पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही संबंधित विभागों की आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC भी ली जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या नागरिक समस्या पैदा न हो।
मांग रखी गई कि MCD और PWD की NOC के साथ-साथ संबंधित भूमि एजेंसी की सभी आवश्यक स्वीकृतियां भी सुनिश्चित की जाएं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तावित व्यावसायिक गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं और उनसे क्षेत्र की मौजूदा सुविधाओं पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा।
विधानसभा में यह भी जोर दिया गया कि किसी भी विकास या व्यावसायिक आवंटन का उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाना होना चाहिए। यदि किसी स्थान पर व्यावसायिक गतिविधि शुरू होने से यातायात जाम, पार्किंग संकट या नाले के रखरखाव जैसी समस्याएं बढ़ती हैं तो ऐसी योजना की समीक्षा जरूरी है।
झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग और वाहन पहुंचते हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाना जरूरी है, ताकि आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ-साथ आम जनता की सुविधा और सुरक्षा भी प्रभावित न हो।
अब इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। व्यावसायिक आवंटन को लेकर पर्याप्त पार्किंग, यातायात प्रबंधन, नाले की सफाई और सभी जरूरी विभागीय स्वीकृतियां सुनिश्चित होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाने की मांग की गई है।



