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DTC Strike: दिल्ली में DTC ड्राइवरों की हड़ताल पर ESMA का असर, निजी ऑपरेटरों के साथ लगाए गए 500 ड्राइवर

DTC Strike: दिल्ली में DTC ड्राइवरों की हड़ताल पर ESMA का असर, निजी ऑपरेटरों के साथ लगाए गए 500 ड्राइवर

नई दिल्ली। दिल्ली में 16 सितंबर से चल रही DTC ड्राइवरों की हड़ताल पर अब Essential Services Maintenance Act (ESMA) लागू होने का असर दिखाई देने लगा है। दिल्ली सरकार ने DTC और क्लस्टर बस सेवाओं को छह महीने के लिए आवश्यक परिवहन सेवा घोषित करते हुए कर्मचारियों की हड़ताल और आंदोलन पर रोक लगा दी है। सरकार के इस कदम के बाद बस सेवाओं में कुछ सुधार हुआ है और यात्रियों को पहले के मुकाबले राहत मिलने की बात सामने आई है।

दिल्ली सरकार की ओर से जारी आदेश में DTC और क्लस्टर बस सेवाओं से जुड़े नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा, आउटसोर्स और निजी कंसेशनायर के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। आदेश छह महीने तक प्रभावी रहेगा। सरकार ने यह कदम बस सेवाओं में लगातार हो रहे व्यवधान और उससे आम यात्रियों को हो रही परेशानी को देखते हुए उठाया है।

हड़ताल के कारण निजी कंसेशनायरों द्वारा संचालित बस सेवाओं में भी ड्राइवरों की कमी सामने आई। इसके बाद DTC के करीब 500 ड्राइवरों को निजी ऑपरेटरों के साथ बस संचालन में लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें ऐसे कुछ नियमित ड्राइवर भी शामिल हैं जिन्हें पहले गैर-ड्राइविंग ड्यूटी दी गई थी। उन्हें बस संचालन के लिए भेजे जाने का उद्देश्य ड्राइवरों की कमी के कारण प्रभावित सेवाओं को सामान्य करना है।

दिल्ली में सार्वजनिक बस परिवहन का बेड़ा करीब 6,600 बसों का है। इसमें लगभग 4,900 इलेक्ट्रिक और करीब 1,750 CNG बसें शामिल हैं। हड़ताल के दौरान ड्राइवरों की कमी का असर इन बस सेवाओं के संचालन पर पड़ा, जिसके चलते कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

हड़ताल पर गए संविदा ड्राइवर और कंडक्टर वेतन बढ़ाने के साथ मेडिकल सुविधा, दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगें कर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि संविदा ड्राइवरों को फिलहाल करीब 747 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जबकि उनकी मांग प्रतिदिन कम से कम 2,000 रुपये करने की है। यूनियन का कहना है कि केवल वेतन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि मेडिकल और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारी ड्राइवरों के मुताबिक, संविदा कर्मचारियों की मासिक आय करीब 22 हजार रुपये तक है, जबकि स्थायी DTC कर्मचारियों की तनख्वाह इससे काफी अधिक है। इसी अंतर को लेकर ड्राइवर समान काम के लिए बेहतर वेतन और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में दैनिक भुगतान की राशि को लेकर अंतर सामने आया है, इसलिए यूनियन और संबंधित अधिकारियों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

हड़ताल की शुरुआत 16 सितंबर को निजी एजेंसियों के माध्यम से DTC बसों का संचालन करने वाले ड्राइवरों के काम रोकने से हुई थी। ड्राइवरों ने बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा समेत कई मांगें रखीं। हड़ताल के कारण दिल्ली के कई इलाकों में बस सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा।

हड़ताल के दौरान दिल्ली मेट्रो पर भी अतिरिक्त यात्रियों का दबाव बढ़ा। शुरुआती दिनों में DMRC ने यात्रियों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनें चलाने और परिचालन व्यवस्था बढ़ाने की जानकारी दी थी। इससे साफ हुआ कि DTC बस सेवाओं में व्यवधान का असर दिल्ली के दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों पर भी पड़ा।

अब ESMA लागू होने के बाद सरकार की प्राथमिकता बस सेवाओं को नियमित बनाए रखने की है। वहीं ड्राइवर यूनियन का कहना है कि उनकी मूल मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत तथा मांगों को लेकर होने वाले निर्णय पर नजर रहेगी। फिलहाल ESMA के तहत हड़ताल और आंदोलन पर छह महीने की रोक लागू है और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ड्राइवरों की तैनाती की गई है।

 

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