Kalyanpuri MCD Employee Death: कल्याणपुरी में MCD कर्मचारी की मौत, AAP पार्षद पर 15 लाख के लोन फ्रॉड का आरोप; परिवार ने की कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी थाना क्षेत्र में MCD कर्मचारी दीपक की मौत के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि आर्थिक दबाव और कथित धोखाधड़ी के कारण दीपक लंबे समय से परेशान थे। परिजनों ने आम आदमी पार्टी के मौजूदा निगम पार्षद विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
परिजनों के मुताबिक, दीपक दिल्ली नगर निगम में स्थायी कर्मचारी थे और अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। परिवार का आरोप है कि दीपक के नाम पर करीब 15 लाख रुपये का लोन दिलाने के नाम पर कथित तौर पर धोखाधड़ी की गई। इसी लोन और उससे जुड़े आर्थिक दबाव के कारण वह काफी समय से परेशान चल रहे थे।
परिवार ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के मौजूदा निगम पार्षद विजय कुमार पर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि दीपक के नाम पर लोन लिया गया था और इस पूरी प्रक्रिया में कथित वित्तीय गड़बड़ी हुई। परिवार चाहता है कि पुलिस लोन से जुड़े दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच करे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
परिजनों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि दीपक की कई महीनों की सैलरी भी कथित तौर पर आरोपी के कब्जे में थी। परिवार के अनुसार, अपनी कमाई पर नियंत्रण नहीं रहने और लोन से जुड़ी आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण दीपक लगातार वित्तीय संकट का सामना कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार का कहना है कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव का असर दीपक पर पड़ रहा था। उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही थीं और इसी वजह से वह मानसिक दबाव में भी थे। परिजनों ने उनकी मौत को कथित वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक परेशानी से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले में लगाए गए आरोप गंभीर होने के कारण पुलिस अब अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि दीपक के नाम पर वास्तव में कितना लोन लिया गया था, लोन की रकम किस खाते में गई, उसका इस्तेमाल किसने किया और उसकी किस्तों का भुगतान किसके द्वारा किया जा रहा था।
पुलिस जांच में दीपक की सैलरी से संबंधित आरोप भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। परिवार के दावे के मुताबिक यदि कई महीनों से उनकी सैलरी पर किसी दूसरे व्यक्ति का कथित नियंत्रण था तो इससे जुड़े बैंक रिकॉर्ड और लेन-देन की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल इस संबंध में आधिकारिक जांच के नतीजे सामने नहीं आए हैं।
दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद इलाके में भी मामला चर्चा का विषय बन गया। परिवार की ओर से एक मौजूदा निगम पार्षद पर आरोप लगाए जाने के कारण घटना ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। परिजन चाहते हैं कि मामले की जांच बिना किसी दबाव के हो और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद भाजपा विधायक रवि कांत उज्जैनवाल भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विधायक ने कहा कि परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा विधायक ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग भी की है। उनका कहना है कि MCD कर्मचारी की मौत और परिवार द्वारा लगाए गए वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों की पूरी जांच आवश्यक है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
मृतक दीपक के परिवार के सामने उनकी मौत के बाद गंभीर आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि दीपक अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। वह अपने पीछे पत्नी, दो बच्चों और बुजुर्ग मां को छोड़ गए हैं। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से उनकी नौकरी और वेतन पर निर्भर थी।
दीपक के अचानक चले जाने से परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च के साथ बच्चों के भविष्य और बुजुर्ग मां की देखभाल की चिंता भी खड़ी हो गई है। परिवार पहले से कथित लोन और आर्थिक परेशानियों का आरोप लगा रहा है, ऐसे में दीपक की मौत के बाद उनकी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल दीपक की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना है। इसके साथ परिवार की ओर से लगाए गए करीब 15 लाख रुपये के कथित लोन फ्रॉड, सैलरी पर कथित कब्जे और वित्तीय दबाव से संबंधित आरोपों की भी जांच की जा रही है।
जांच में बैंक खाते, लोन से जुड़े दस्तावेज, वेतन के भुगतान का रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पुलिस संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोपों की सच्चाई का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू होने की संभावना के बीच सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस जांच है। परिवार ने जहां AAP पार्षद विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं इन आरोपों को अभी जांच के जरिए प्रमाणित किया जाना बाकी है। ऐसे में पुलिस की जांच पूरी होने से पहले आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
फिलहाल कल्याणपुरी थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, उनके नाम पर कथित 15 लाख रुपये के लोन का वास्तविक मामला क्या था और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं परिवार ने निष्पक्ष जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।



