Delhi Police Action: गफ्फार मार्केट में चोरी के मोबाइल अनलॉक कर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 67 मोबाइल डिवाइस समेत दो तकनीशियन गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की ईस्ट डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ टीम ने चोरी हुए मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त और उन्हें अनलॉक कर दोबारा बेचने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने करोल बाग स्थित गफ्फार मार्केट में छापेमारी कर दो मोबाइल सॉफ्टवेयर तकनीशियनों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 45 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 22 मोबाइल फोन बॉडी, एक लैपटॉप और मोबाइल सुरक्षा लॉक तोड़ने में इस्तेमाल होने वाला चीनी एएमपी टूल बरामद किया गया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई मोबाइल चोरी के मामलों की जांच और रिकवरी अभियान के दौरान प्राप्त एक विशेष खुफिया सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली थी कि गफ्फार मार्केट में कुछ लोग चोरी के मोबाइल फोन खरीदकर उन्हें विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से अनलॉक कर रहे हैं और बाद में ग्रे मार्केट में बेच रहे हैं।
सूचना मिलने के बाद ईस्ट डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने कई दिनों तक तकनीकी जांच, स्थानीय स्तर पर पूछताछ और निगरानी की। जांच में मिले सुरागों के आधार पर करोल बाग के बीडन पुरा स्थित “केजीएन सॉफ्टवेयर एंड मोबाइल रिपेयरिंग इंस्टीट्यूट” नामक दुकान पर अचानक छापा मारा गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। दुकान में मौजूद दोनों व्यक्तियों से बरामद मोबाइल फोन के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 29 वर्षीय मोहम्मद जलाल निवासी लोनी, गाजियाबाद और 27 वर्षीय इमरान निवासी राजपुर खुर्द एक्सटेंशन, नई दिल्ली के रूप में हुई है। दोनों मोबाइल सॉफ्टवेयर तकनीशियन के रूप में काम करते थे और संयुक्त रूप से दुकान का संचालन कर रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे चोरी या संदिग्ध माध्यमों से प्राप्त मोबाइल फोन को विशेष सॉफ्टवेयर और उपकरणों की मदद से अनलॉक करते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी एक चीनी एएमपी टूल का इस्तेमाल करते थे, जो मोबाइल फोन के फैक्ट्री रीसेट प्रोटेक्शन (FRP) और अन्य सुरक्षा फीचर्स को बायपास करने में सक्षम है।
इस तकनीक की मदद से मोबाइल फोन से सुरक्षा संबंधी जानकारी मिटा दी जाती थी, जिससे असली मालिक की पहचान करना कठिन हो जाता था। इसके बाद मोबाइल फोन को दोबारा बाजार में बेच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल सॉफ्टवेयर में काफी दक्ष थे और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक टूल्स तथा एप्लिकेशन का उपयोग कर डिवाइस की सुरक्षा प्रणाली में बदलाव करते थे।
जांच के दौरान बरामद मोबाइल फोन में से सात मोबाइल पहले से दर्ज चोरी और गुमशुदगी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं। इनमें दिल्ली के मधु विहार, न्यू अशोक नगर, मंडावली और गाजीपुर क्षेत्रों के अलावा हरियाणा के पानीपत तथा उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दर्ज मामलों से जुड़े मोबाइल भी शामिल हैं। पुलिस अब शेष बरामद मोबाइल फोन की पहचान के लिए आईएमईआई विश्लेषण और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से कई मोबाइल चोरी के मामलों का खुलासा हो सकता है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को चोरी के मोबाइल फोन कौन उपलब्ध कराता था और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बरामद सामान में 45 एंड्रॉयड मल्टीमीडिया मोबाइल फोन, 22 मोबाइल फोन बॉडी, एक लैपटॉप और एक चीनी एएमपी टूल शामिल है। पुलिस ने सभी उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस का कहना है कि चोरी के मोबाइल फोन की खरीद, अनलॉकिंग और अवैध बिक्री में शामिल नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई से दिल्ली और आसपास के राज्यों में सक्रिय मोबाइल चोरी गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और कई पीड़ितों को उनके खोए हुए मोबाइल वापस मिल सकते हैं।



