Mumbai Protest: 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित भागीदारी पर NHRC सख्त, जांच के निर्देश
मुंबई में 2 अक्टूबर 2026 को हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुंबई पुलिस समेत संबंधित विभागों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मामले की जांच करने, उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और बच्चों की पहचान तथा निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। 2 अक्टूबर को हुए इस प्रदर्शन में CJP नेता अभिजीत दिपके के अलावा विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आई थी।
NHRC के सामने पहुंची शिकायत में सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ फोटो और वीडियो का हवाला दिया गया है। शिकायत के अनुसार, एक बच्चे को कथित तौर पर भीड़ के ऊपर उठाया गया था और प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए जा रहे थे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर पहले से ग्रुप और चैट में चर्चा हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता और नाबालिगों की भागीदारी की परिस्थितियां जांच का विषय हैं।
आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत में X Corp. के ग्रिवांस ऑफिसर और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। संबंधित अधिकारियों से मामले में कार्रवाई और जांच की रिपोर्ट मांगी गई है।
NHRC ने मुंबई पुलिस को प्रदर्शन से संबंधित तस्वीरों, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि जांच के दौरान यदि कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो उसके अनुसार FIR दर्ज की जाए। साथ ही यह पता लगाने को कहा गया है कि नाबालिग बच्चे किन परिस्थितियों में प्रदर्शन में पहुंचे और आयोजकों, समन्वयकों, उनके साथ मौजूद वयस्कों तथा बच्चों की भागीदारी में मदद करने वाले अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
आयोग ने कथित ग्रुप और चैट से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा जरूरत पड़ने पर उनकी फॉरेंसिक जांच कराने को भी कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि बच्चों की भागीदारी पहले से तय थी या नहीं और क्या उनकी नाबालिग स्थिति का किसी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह सभी बिंदु फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोप और जांच के निर्देशों का हिस्सा हैं, इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना गया है।
NHRC ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की संबंधित धाराओं समेत अन्य लागू कानूनों के तहत संभावित उल्लंघनों की भी जांच करने को कहा है। बच्चों की तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने वाले अकाउंट की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। MeitY और X Corp. से संबंधित डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने और बच्चों की सुरक्षा तथा निजता से जुड़े नियमों के अनुपालन की जांच में सहयोग करने को कहा गया है।
महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने और उन्हें आवश्यक काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की बात कही गई है। आयोग ने पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता, गरिमा और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा करने पर जोर दिया है।
NHRC ने संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले डिजिटल तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मामले में किसी व्यक्ति या संस्था की कोई कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
इस बीच मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर अलग से भी मामला दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शिवाजी पार्क पुलिस ने CJP के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कथित रूप से अनुमति के बिना प्रदर्शन और नारेबाजी करने के संबंध में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई नाबालिगों से संबंधित NHRC जांच से अलग पुलिस कार्रवाई है।
फिलहाल नाबालिगों की प्रदर्शन में मौजूदगी, उनकी कथित भागीदारी की परिस्थितियों और सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों एवं वीडियो के प्रसार से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। NHRC की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की स्थिति और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्य अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।



