Preet Vihar Cafe Seal: पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर सील किया कैफे, कोर्ट पहुंचा संचालक; अदालत की नाराजगी के बाद तत्काल खुली सील
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक कैफे को कथित तौर पर पुलिसकर्मी द्वारा सील किए जाने का मामला अदालत तक पहुंच गया। कैफे संचालक ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां सुनवाई के दौरान प्रतिष्ठान को सील करने के अधिकार और अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। अदालत की नाराजगी के बाद कैफे पर लगाई गई सील तत्काल हटा दी गई और वहां दोबारा कामकाज शुरू हो गया।
मामला प्रीत विहार इलाके में संचालित एक कैफे से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने कैफे पर सील लगा दी थी। इस कार्रवाई के बाद प्रतिष्ठान का संचालन पूरी तरह रुक गया। कैफे संचालक ने पुलिस की कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताते हुए कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।
कैफे संचालक की ओर से मामला अदालत के सामने रखे जाने के बाद पुलिस द्वारा की गई कथित सीलिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि प्रतिष्ठान को बंद करने या सील करने की कार्रवाई किस आदेश के आधार पर की गई और ऐसा करने के लिए संबंधित अधिकारी के पास क्या कानूनी अधिकार था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और कैफे पर लगी सील को तत्काल प्रभाव से खोल दिया गया। सील हटने के बाद प्रतिष्ठान में एक बार फिर कामकाज शुरू हो गया।
इस मामले ने अब पुलिस की शक्तियों और किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी कैफे या अन्य प्रतिष्ठान में किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है तो उसे सील करने के लिए किन नियमों का पालन किया जाना चाहिए और कौन सा विभाग ऐसी कार्रवाई के लिए सक्षम होता है।
मामले को लेकर अधिवक्ता का कहना है कि किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को सील करने की कार्रवाई निर्धारित कानून और प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी चाहिए। सामान्य तौर पर ऐसी कार्रवाई संबंधित सक्षम या अधिकृत विभाग द्वारा कानूनी प्रावधानों और आवश्यक आदेश के आधार पर की जाती है।
अधिवक्ता ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सामान्य परिस्थितियों में कोई पुलिसकर्मी अपने स्तर पर किसी प्रतिष्ठान को सीधे सील कर सकता है या नहीं। उनका कहना है कि इस मामले में यह देखा जाना जरूरी है कि कैफे को सील करने से पहले किसी सक्षम प्राधिकरण का आदेश मौजूद था या नहीं और कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
घटनाक्रम के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल उस आदेश को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके आधार पर कैफे को बंद किया गया। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित सीलिंग से पहले संबंधित स्थानीय निकाय या किसी अन्य सक्षम विभाग से अनुमति अथवा निर्देश लिया गया था या नहीं।
किसी प्रतिष्ठान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई में अधिकार क्षेत्र का सवाल महत्वपूर्ण होता है। अलग-अलग मामलों में लाइसेंस, भवन नियम, अग्नि सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी मानक या अन्य कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग विभाग कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में प्रीत विहार के इस मामले में वास्तविक कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह कानूनी जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।
कैफे संचालक की ओर से अदालत जाने के बाद सील का तत्काल खुलना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई की वैधानिकता और प्रक्रिया को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। हालांकि मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित रिकॉर्ड, आदेश और अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही तय होगा।
यह भी देखा जाना बाकी है कि कैफे को सील करने से पहले संचालक को कोई नोटिस दिया गया था या नहीं। यदि कोई लिखित आदेश जारी किया गया था तो वह किस अधिकारी या विभाग की ओर से जारी हुआ था और उसमें कार्रवाई का आधार क्या बताया गया था, इन बिंदुओं की जानकारी मामले की स्थिति को और स्पष्ट कर सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोर्ट में मामला पहुंचने और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद कैफे की सील हटा दी गई है। प्रतिष्ठान में दोबारा कामकाज शुरू हो चुका है, लेकिन सील लगाने की मूल कार्रवाई को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ है।
पूरे घटनाक्रम के बाद अब मुख्य सवाल यही है कि प्रीत विहार के कैफे को किस कानूनी प्रावधान, किस सक्षम अधिकारी के आदेश और किन परिस्थितियों में सील किया गया था। इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी या नहीं।



