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Shahdara cyber police: दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 14 आरोपी गिरफ्तार, 8 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा

Shahdara cyber police: दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 14 आरोपी गिरफ्तार, 8 करोड़ से ज्यादा की ठगी का खुलासा

दिल्ली पुलिस की शाहदरा साइबर थाना टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने और निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस के अनुसार अब तक 8 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के लिंक सामने आए हैं।

मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को हुई, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि गीता कॉलोनी के एक होटल में कुछ लोग संदिग्ध साइबर गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और साइबर थाना शाहदरा की टीम ने होटल में छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान अलग-अलग कमरों में विभिन्न राज्यों के कई लोग ठहरे हुए मिले। पूछताछ और तलाशी में पुलिस ने 12 लोगों को मौके से हिरासत में लिया। जांच में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा थे, जो नौकरी दिलाने और अन्य वित्तीय लालच देकर लोगों को ठगता था।

इस मामले में एफआईआर संख्या 20/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस टीम में इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एसआई श्याम बिहारी, एसआई विवेक, एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, दीपक, नरेंद्र, कपिल और सचिन शामिल थे। पूरी कार्रवाई SHO विजय कुमार और ACP मोहित सिंह की निगरानी में की गई।

जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से जुड़े हुए थे। यह पूरा नेटवर्क Telegram ग्रुप्स के जरिए संचालित किया जा रहा था। गिरोह के मुख्य हैंडलर प्रदीप उर्फ अल्फा और किंग उर्फ तेजपाल सिंह उर्फ तेजी बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया, जॉब पोर्टल्स और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए नौकरी तलाश रहे लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें वर्क फ्रॉम होम, पार्ट टाइम जॉब और हाई सैलरी का झांसा दिया जाता था। इसके बाद बातचीत को टेलीग्राम पर शिफ्ट कर दिया जाता था ताकि पहचान छिपी रहे और एन्क्रिप्टेड चैट का फायदा उठाया जा सके।

गिरोह लोगों को फर्जी कंपनी प्रोफाइल, नकली अपॉइंटमेंट लेटर और टास्क बेस्ड कमाई के स्कीम दिखाकर भरोसा दिलाता था। शुरुआत में छोटे भुगतान देकर लोगों का विश्वास जीता जाता और बाद में उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, टास्क चार्ज और निवेश के नाम पर मोटी रकम ठगी जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था। एक बैंक अकाउंट 40 NCRP शिकायतों से जुड़ा मिला, जिसमें करीब 1.5 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। वहीं एक कैनरा बैंक एटीएम कार्ड 3 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा पाया गया।

डिजिटल जांच के दौरान पुलिस को टेलीग्राम चैट्स, एपीके टूल्स, मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में सिम कार्ड मिले, जिससे गिरोह की संगठित साजिश का खुलासा हुआ। बाद में पुलिस ने पंजाब के लुधियाना से दो और आरोपियों प्रदीप उर्फ अल्फा और गेवी को गिरफ्तार किया, जिसके बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 14 हो गई।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, तीन एटीएम कार्ड, चार चेकबुक और दो स्टांप बरामद किए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी जांच कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले फर्जी जॉब ऑफर, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए आने वाले संदिग्ध मैसेज और किसी भी तरह के भुगतान के अनुरोध से सतर्क रहें। पुलिस ने कहा कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी जांच और सत्यापन जरूर करें।

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