Delhi Crime: ओडिशा से दिल्ली तक फैले अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, मुख्य सप्लायर गिरफ्तार
नई दिल्ली। पूर्वी जिला पुलिस की एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड (एएनएस) ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में ओडिशा और आंध्र प्रदेश सीमा क्षेत्र से मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में कुल 22 किलो 450 ग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक मारुति सियाज कार भी जब्त की गई है।
दिल्ली पुलिस द्वारा नशा मुक्त समाज के लक्ष्य को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्वी जिले की एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड को दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गांजा तस्करों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। एसीपी ऑपरेशन पवन कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर अरुण कुमार, एसआई विकास, एसआई देवेंद्र तथा अन्य पुलिसकर्मियों की टीम लगातार खुफिया सूचनाएं जुटाने में लगी हुई थी।
पुलिस को तीन जून 2026 को सूचना मिली कि गाजियाबाद निवासी सोनू कुमार नामक व्यक्ति बड़ी मात्रा में गांजा लेकर गाजीपुर स्थित कॉम्पिटेंट मारुति शोरूम के पीछे वाली सड़क के पास आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर जाल बिछाया और संदिग्ध वाहन की निगरानी शुरू कर दी।
कुछ समय बाद पुलिस ने मारुति सियाज कार में बैठे सोनू कुमार को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान कार से दो बैग बरामद हुए, जिनमें कुल 22 किलो 450 ग्राम गांजा पाया गया। बरामद मात्रा व्यावसायिक श्रेणी की थी। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सोनू कुमार ने खुलासा किया कि उसे यह गांजा ओडिशा के मलकानगिरी जिले में रहने वाले देबा मंडी नामक व्यक्ति से मिलता था। वह गांजे की खेप दिल्ली-एनसीआर में लाकर छोटे-छोटे तस्करों और ग्राहकों को सप्लाई करता था। जांच में सामने आया कि देबा मंडी इस पूरे नेटवर्क का मुख्य स्रोत था।
पुलिस अधिकारियों ने महसूस किया कि जब तक मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक दिल्ली-एनसीआर में मादक पदार्थों की आपूर्ति को पूरी तरह नहीं रोका जा सकेगा। इसके बाद एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड ने देबा मंडी की तलाश में विशेष अभियान शुरू किया। आरोपी ने अपने सभी मोबाइल नंबर बंद कर दिए थे और ओडिशा के जंगलों एवं सीमावर्ती इलाकों में छिपकर रह रहा था।
लगातार तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और विभिन्न जिलों में छापेमारी के बाद पुलिस को उसकी गतिविधियों का सुराग मिला। 17 जून को पुलिस टीम ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास उसका पीछा करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। ट्रांजिट रिमांड पर उसे दिल्ली लाया गया, जहां उसे इस मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में देबा मंडी ने बताया कि उसका गांव घने जंगलों वाले इलाके में स्थित है, जहां पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध रूप से गांजा उगाया जाता है। दुर्गम इलाके होने के कारण वहां प्रशासन की पहुंच सीमित रहती है। इसी का फायदा उठाकर उसने गांजे की खेती शुरू की और बाद में उसे पैक कर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करने लगा।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2018 में उसे मध्य प्रदेश के शाहडोल जिले में एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और करीब तीन साल तक जेल में रहना पड़ा था। वर्ष 2022 में जेल से बाहर आने के बाद उसने मजदूरी का काम शुरू किया, लेकिन बाद में फिर से नशा तस्करी के कारोबार में शामिल हो गया। लगभग एक वर्ष पहले उसकी मुलाकात सोनू कुमार से हुई और दोनों ने मिलकर दिल्ली-एनसीआर में गांजा सप्लाई का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों का मुख्य उद्देश्य अवैध तरीके से अधिक धन कमाना था। देबा मंडी ओडिशा से गांजा भेजता था, जबकि सोनू कुमार दिल्ली-एनसीआर में उसकी सप्लाई करता था। दोनों एक संगठित अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह का हिस्सा थे।
पुलिस ने इस मामले में 22 किलो 450 ग्राम गांजा और तस्करी में प्रयुक्त मारुति सियाज कार जब्त की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य तस्करों, खरीदारों तथा सप्लाई चेन के सदस्यों की पहचान की जा रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ “टॉप टू बॉटम” कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अभियान लगातार चलाया जाएगा।



