Delhi: शाहदरा-गाजीपुर मार्ग पर मलबे का अंबार, ट्रैक्टर माफिया पर गंभीर आरोपों से बढ़ा विवाद
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली में शाहदरा से गाजीपुर जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे बड़ी मात्रा में मलबा डाले जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि सड़क के किनारे जमा हो रहा निर्माण और तोड़फोड़ का मलबा न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इस बीच जॉन अध्यक्ष रामकिशोर शर्मा ने कथित ट्रैक्टर माफिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।
रामकिशोर शर्मा का कहना है कि कुछ ट्रैक्टर चालक रात-दिन सड़क किनारे अवैध रूप से मलबा डाल रहे हैं और मलबा फेंकने के बाद मौके से फरार हो जाते हैं। उनका आरोप है कि इस कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार शाहदरा से गाजीपुर जाने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क किनारे मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं। मलबा जमा होने से सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। कई बार यातायात धीमा पड़ जाता है और जाम की स्थिति भी बन जाती है। लोगों का कहना है कि सड़क पर उड़ने वाली धूल से आसपास रहने वाले नागरिकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
रामकिशोर शर्मा ने दावा किया कि ट्रैक्टर माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ट्रैक्टर पुलिस विभाग से जुड़े लोगों के हैं, जिसके कारण इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में बाधाएं आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग की ओर से भी इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि सड़क पर लगातार मलबा डाले जाने से लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। धूल प्रदूषण बढ़ रहा है और वाहन चालकों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर मलबा डाला जा रहा है, वहां एक चेतावनी बोर्ड भी लगा हुआ है। बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यहां मलबा फेंकने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद लगातार मलबा डाला जा रहा है, जिससे नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नियमों के अनुसार निर्माण और विध्वंस कार्यों से निकलने वाले मलबे का निस्तारण निर्धारित स्थानों पर किया जाना आवश्यक है। सार्वजनिक सड़कों, खाली भूखंडों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मलबा फेंकना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इसके लिए दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी मौजूद है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़कों पर बढ़ता मलबा यातायात व्यवस्था को प्रभावित करने के साथ-साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बन सकता है।
फिलहाल शाहदरा-गाजीपुर मार्ग पर मलबा डाले जाने और कथित ट्रैक्टर माफिया को लेकर लगाए गए आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर संबंधित विभागों की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है। प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और इस समस्या का समाधान कैसे किया जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



