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Delhi Cyber Fraud: साउथ-वेस्ट दिल्ली पुलिस ने इंटरस्टेट साइबर ठग गिरोह का किया भंडाफोड़, 8 आरोपी गिरफ्तार

Delhi Cyber Fraud: साउथ-वेस्ट दिल्ली पुलिस ने इंटरस्टेट साइबर ठग गिरोह का किया भंडाफोड़, 8 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली के साउथ-वेस्ट जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह WhatsApp ग्रुप बनाकर लोगों को फर्जी स्टॉक मार्केट निवेश योजनाओं में फंसाता था और भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों की ठगी करता था। इस मामले में करीब 24 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार 20 मार्च 2026 को साउथ-वेस्ट जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में e-FIR नंबर 122/26 दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग और निवेश से मोटा मुनाफा कमाने का दावा किया गया। ग्रुप में लगातार फर्जी प्रॉफिट स्क्रीनशॉट, नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड और बनावटी निवेश रिपोर्ट साझा की जाती थीं, ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित को बड़े रिटर्न का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में करीब 24 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित ने निवेश की रकम और मुनाफा निकालने की कोशिश की तो ठग लगातार नए बहाने बनाकर और अधिक पैसे जमा कराने का दबाव बनाने लगे। बाद में खुद के साथ ठगी होने का एहसास होने पर पीड़ित ने NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में और ACP संघमित्रा की निगरानी में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने WhatsApp नंबरों, बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और मनी ट्रेल का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए कई WhatsApp नंबर कंबोडिया से संचालित हो रहे थे।

लगातार तकनीकी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद पुलिस ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरमनजोत सिंह, कैसर मसूदी, अभिषेक, मोहम्मद जाहिद, आमिर मलिक, अमरजीत अहिरवार, आलोक शर्मा और अनंत पांडे के रूप में हुई है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में फर्जी कंपनियों और फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने और ट्रांजैक्शन छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार कुछ बैंक खाते विदेशी साइबर अपराधियों को APK बेस्ड रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन के जरिए संचालित करने के लिए उपलब्ध कराए गए थे, जिससे विदेश में बैठे साइबर ठग भारत में बैंकिंग गतिविधियों को नियंत्रित कर रहे थे।

मध्य प्रदेश से गिरफ्तार आरोपी अनंत पांडे विदेशी साइबर हैंडलर्स और भारत में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों के बीच अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचने में जुटी हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत बरामद किए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस गिरोह ने देशभर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान WhatsApp ग्रुप, फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या ज्यादा मुनाफे के लालच में आकर निवेश न करें। किसी भी संदिग्ध साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत NCRP पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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