Delhi Crime: दिल्ली पुलिस ने तोड़ी अंतरराज्यीय गांजा तस्करी की बड़ी चेन, ओडिशा-आंध्र सीमा से मुख्य सप्लायर गिरफ्तार
नई दिल्ली। नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पूर्वी जिला पुलिस की एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड (एएनएस) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने करीब 22 किलो 450 ग्राम गांजा बरामद करने के साथ-साथ इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर को ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा से गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड को सूचना मिली थी कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गांजे की सप्लाई करने वाला एक तस्कर गाजीपुर इलाके में बड़ी खेप लेकर आने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने गाजीपुर स्थित टाल्को टी-पॉइंट के पास जाल बिछाया और एक मारुति सियाज कार में पहुंचे आरोपी सोनू कुमार को दबोच लिया।
तलाशी के दौरान कार से दो बैग बरामद हुए, जिनमें कुल 22 किलो 450 ग्राम गांजा रखा हुआ था। बरामद गांजा वाणिज्यिक श्रेणी का पाया गया। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू की।
जांच के दौरान सोनू कुमार ने खुलासा किया कि वह ओडिशा के मलकानगिरी जिले के रहने वाले देबा मांडी नामक व्यक्ति से गांजा खरीदता था। इसके बाद वह दिल्ली-एनसीआर में इसकी सप्लाई करता था। पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट हो गया कि जब तक इस नेटवर्क के मुख्य स्रोत तक नहीं पहुंचा जाएगा, तब तक नशीले पदार्थों की आपूर्ति पूरी तरह नहीं रोकी जा सकती।
इसके बाद एंटी नारकोटिक्स स्क्वॉड ने मुख्य सप्लायर देबा मांडी की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार सोनू की गिरफ्तारी के बाद देबा मांडी ने अपने सभी मोबाइल फोन बंद कर दिए और भूमिगत हो गया। उसकी तलाश में पुलिस टीम ने ओडिशा के विभिन्न जिलों में कई छापेमारी की और तकनीकी व मानव खुफिया तंत्र की मदद से लगातार निगरानी रखी।
लगातार प्रयासों के बाद 17 जून को पुलिस को उसकी लोकेशन का सुराग मिला। इसके बाद ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के पास पीछा कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रांजिट रिमांड पर उसे दिल्ली लाया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और तस्करी की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी हुई है।
पूछताछ में देबा मांडी ने बताया कि उसका गांव घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों के करीब स्थित है, जहां प्राकृतिक रूप से गांजे की खेती होती थी। उसने इसकी अवैध मांग को देखते हुए जंगलों में गांजा उगाना और उसे पैक कर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करना शुरू कर दिया। उसने यह भी स्वीकार किया कि वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और वह करीब तीन वर्ष तक जेल में रहा था।
जेल से रिहा होने के बाद कुछ समय तक मजदूरी करने के बावजूद वह दोबारा नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल हो गया। करीब एक वर्ष पहले उसकी मुलाकात गाजियाबाद निवासी सोनू कुमार से हुई और दोनों ने मिलकर दिल्ली-एनसीआर में गांजे की सप्लाई का नेटवर्क तैयार कर लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी आर्थिक लाभ के लिए संगठित रूप से नशे की तस्करी कर रहे थे।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 10 लाख रुपये मूल्य का 22 किलो 450 ग्राम गांजा तथा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मारुति सियाज कार भी जब्त की है। पूर्वी जिला पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच तेज कर दी गई है।



