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MCD Demolition: सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण पर सख्ती, विनोद नगर में इमारत पर डिमोलिशन शुरू; बिल्डर और स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

MCD Demolition: सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण पर सख्ती, विनोद नगर में इमारत पर डिमोलिशन शुरू; बिल्डर और स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ दिल्ली नगर निगम (MCD) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी अभियान के तहत पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में MCD की टीम ने एक इमारत पर डिमोलिशन की कार्रवाई शुरू की है। निगम का कहना है कि इमारत में किए गए निर्माण के कुछ हिस्से निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। वहीं दूसरी तरफ इमारत के बिल्डर और कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण वैध है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण कार्रवाई को लेकर मौके पर सवाल भी उठाए गए।

सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। अलग-अलग इलाकों में ऐसी इमारतों और निर्माणों की पहचान की जा रही है, जहां नियमों के उल्लंघन की शिकायत है या निर्माण को लेकर सवाल उठे हैं।

इसी कार्रवाई के तहत MCD की टीम विनोद नगर पहुंची। निगम की टीम ने संबंधित इमारत में नियमों के विपरीत बताए जा रहे निर्माण के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।

डिमोलिशन की कार्रवाई शुरू होते ही मौके पर आसपास रहने वाले लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने निगम की कार्रवाई को देखते हुए इमारत के निर्माण की वैधता और आसपास मौजूद दूसरी इमारतों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

MCD का पक्ष है कि संबंधित इमारत में निर्माण का कुछ हिस्सा नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर डिमोलिशन की कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि बिल्डर ने निगम के इस दावे पर सवाल उठाया है। बिल्डर का कहना है कि इमारत अवैध नहीं है और निर्माण नियमों के अनुसार किया गया है।

बिल्डर की ओर से किए जा रहे इस दावे और MCD की कार्रवाई के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इमारत के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वीकृत निर्माण योजना से जुड़ा है।

यह स्पष्ट होना जरूरी है कि निगम के रिकॉर्ड में संबंधित भूखंड और इमारत की वास्तविक स्थिति क्या है, कितनी मंजिल या कितना निर्माण स्वीकृत था और मौजूदा निर्माण में किस हिस्से को नियमों का उल्लंघन माना गया है।

स्थानीय लोगों ने भी कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि इस इमारत में निर्माण नियमों का उल्लंघन पाया गया है तो आसपास मौजूद दूसरी ऊंची इमारतों की भी जांच की जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों का दावा है कि विनोद नगर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसी इमारतें मौजूद हैं, जिनकी ऊंचाई कार्रवाई वाली इमारत से भी अधिक है।

कुछ लोगों का कहना है कि आसपास पांच से छह मंजिल तक बनी इमारतें दिखाई देती हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण नियमों के खिलाफ है तो ऐसी सभी इमारतों का समान आधार पर सर्वे होना चाहिए।

हालांकि स्थानीय लोगों की ओर से आसपास की इमारतों को लेकर किए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जिन दूसरी इमारतों का उल्लेख किया जा रहा है, उनके पास निर्माण से संबंधित क्या अनुमति और दस्तावेज मौजूद हैं।

किसी इमारत की केवल ऊंचाई देखकर उसके वैध या अवैध होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। निर्माण की वैधता संबंधित स्वीकृत नक्शे, भवन नियमों और निगम के रिकॉर्ड के आधार पर निर्धारित होती है।

इसी वजह से विनोद नगर की इस इमारत को लेकर MCD के आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं से स्पष्ट हो सकेगा कि डिमोलिशन किस विशेष उल्लंघन के आधार पर किया जा रहा है।

बिल्डर ने कार्रवाई के पीछे एक स्थानीय महिला की शिकायत का भी जिक्र किया है। उसका दावा है कि आसपास रहने वाली एक महिला लगातार इमारत के निर्माण को लेकर शिकायत करती रही है।

बिल्डर ने इसके पीछे व्यक्तिगत विवाद होने का आरोप भी लगाया है। इसके साथ ही उसने दावा किया कि उस पर पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया था।

हालांकि बिल्डर के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित महिला का पक्ष भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन आरोपों को बिल्डर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

दूसरी तरफ MCD की कार्रवाई निर्माण नियमों के कथित उल्लंघन के आधार पर की जा रही है। निगम की तरफ से मौके पर संबंधित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की ओर से समान कार्रवाई की मांग भी सामने आई। लोगों का कहना है कि यदि निगम इलाके में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चला रहा है तो सभी संदिग्ध निर्माणों की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। जर्जर इमारतों के साथ अनधिकृत निर्माण और भवनों में नियमों के उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे में MCD अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वे और कार्रवाई कर रही है। जिन स्थानों पर नियमों के उल्लंघन की बात सामने आ रही है, वहां सीलिंग या डिमोलिशन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

विनोद नगर की कार्रवाई में हालांकि विवाद इस बात को लेकर है कि बिल्डर संबंधित निर्माण को वैध बता रहा है, जबकि MCD की कार्रवाई यह संकेत देती है कि निगम ने निर्माण के कुछ हिस्सों में नियमों का उल्लंघन पाया है।

ऐसी स्थिति में आधिकारिक रिकॉर्ड ही दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता स्पष्ट कर सकते हैं। स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, निर्माण की अनुमत सीमा और निगम द्वारा जारी नोटिस जैसे दस्तावेज मामले में महत्वपूर्ण होंगे।

स्थानीय लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि यदि किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण हुआ है तो कार्रवाई केवल चुनिंदा इमारतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उनका कहना है कि पूरे क्षेत्र का सर्वे कर नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी निर्माणों की पहचान की जानी चाहिए। हालांकि कौन सी इमारत वैध है और कौन सी अवैध, इसका फैसला निगम के रिकॉर्ड और संबंधित नियमों के आधार पर ही किया जा सकता है।

MCD के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ सत्य निकेतन जैसी घटनाओं के बाद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भवन नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कार्रवाई को पारदर्शी और समान रूप से लागू करना भी महत्वपूर्ण है।

किसी भी डिमोलिशन कार्रवाई में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि निर्माण के किस हिस्से को अवैध पाया गया और कार्रवाई किस नोटिस या नियम के तहत की जा रही है।

विनोद नगर में कार्रवाई के दौरान सामने आए विरोध और सवालों के बाद MCD के आधिकारिक रिकॉर्ड की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।

बिल्डर का दावा है कि उसने निर्माण नियमों के अनुसार किया है। यदि उसके पास स्वीकृत निर्माण से संबंधित दस्तावेज हैं तो उनकी तुलना निगम के रिकॉर्ड से होने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

इसी तरह स्थानीय लोगों द्वारा आसपास की पांच और छह मंजिला इमारतों को लेकर उठाए गए सवालों की वास्तविकता भी संबंधित इमारतों के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

फिलहाल एक तरफ MCD ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए डिमोलिशन शुरू किया है, जबकि दूसरी तरफ बिल्डर और कुछ स्थानीय लोग कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर बढ़ी सख्ती के बीच विनोद नगर की यह कार्रवाई भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि MCD संबंधित इमारत को लेकर अपने रिकॉर्ड में किस तरह के उल्लंघन दर्ज होने की जानकारी देती है और डिमोलिशन की आगे की कार्रवाई किस स्तर तक जारी रहती है।

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