Delhi Crime: मजनू का टीला बाल सुधार गृह में नाबालिग की पीट-पीटकर हत्या, परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली के मजनू का टीला स्थित बाल सुधार गृह से एक भयावह और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल परिजनों को बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक 17 वर्षीय किशोर कर्ण की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि हमले की यह घटना उस समय हुई जब वह नहा रहा था। गंभीर हालत में उसे आनन-फानन में बाड़ा हिंदूराव अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक कर्ण दक्षिण दिल्ली के तिगड़ी गांव का निवासी था। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मौलाना आजाद अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए एक विशेष मेडिकल पैनल का गठन किया गया है, जो घटना की पारदर्शी जांच करेगा।
कर्ण की मौत से उसका परिवार सदमे में है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने 13 मई को खुद ही अपने बेटे को पुलिस के हवाले किया था ताकि वह सुधार गृह में रहकर अपनी गलतियों से सीख सके और एक अच्छा नागरिक बन सके। उन्हें यह विश्वास था कि बाल सुधार गृह में रहने से उसका जीवन सुधरेगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वही सुधार गृह कर्ण के जीवन की अंतिम मंजिल बन जाएगा।
परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही और लचर सुरक्षा व्यवस्था की वजह से यह दर्दनाक घटना हुई। उनका कहना है कि यदि वहां पर्याप्त निगरानी होती, तो कर्ण की जान बचाई जा सकती थी। आरोप है कि नहाने के दौरान उसके ही कुछ साथियों ने उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस दर्दनाक हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि बाल सुधार गृहों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी कारगर है? जिन स्थानों को सुधार की जगह समझा जाता है, क्या वे ही हिंसा और अपराध के नए अड्डे बनते जा रहे हैं?
फिलहाल स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी गई है। इस हत्याकांड के पीछे की सच्चाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सामने आएगी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की डॉक्टरों की विशेष टीम इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच में जुटी है।
इस घटना ने एक बार फिर बाल सुधार गृहों की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



